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Friday, September 2, 2016

Success Story of Brian Acton (co-founder of Whastapp)



       इस दुनिया में असंभव कुछ भी नहीं, हम वो सब कर सकते हैं, जो हम सोच सकते हैं, और हम वो सब सोच सकते हैं, जो आज तक हमने कभी सोचा नहीं।


     दोस्तों ये पंक्तियाँ उस शख्स के जीवन पर सटीक बैठती हैं, जिसके बारे में आज हम आपको बताने वाले हैं। ब्रायन ऐक्टन (Brian Acton) ये नाम तो आप सभी ने सुना ही होगा।

Monday, August 29, 2016

Interesting facts about the Crow (in Hindi)



     कौआ दुनिया भर में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला पक्षी है। लेकिन क्या आप कौए के बारे में कुछ मजेदार तथ्य जानना चाहते हैं?
     जी हाँ, हम जो जानकारी आपको बता रहे हैं, वो शायद आपको नहीं पता होगी। आइये जानते हैं कौए के बारे में कुछ मजेदार बातें –


1. आकाश में उड़ने वाले पक्षियों में कौआ सबसे ज्यादा बुद्धिमान माना जाता है।


2. कौए का मस्तिष्क काफी विकसित होता है।


3. कौए की दिमाग की संरचना इंसानों से मिलती जुलती है।


4. कौवों की 40 से ज्यादा प्रजातियाँ होती हैं।


5. अंटार्कटिका को छोड़कर कौवे आपको दुनिया में हर जगह मिल जायेंगे।

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6. कौए का वैज्ञानिक नाम है – कर्वस ब्राच्यरहैनचोस (Corvus brachyrhynchos)


7. दुनिया का सबसे छोटा कौआ मैक्सिको में पाया गया जिसका वजन मात्र 40 ग्राम था।


8. इथोपिया में दुनिया का सबसे बड़ा कौआ पाया गया जिसकी लंबाई 65 सेंटीमीटर थी और वजन डेढ़ किलो।


9. जिस दिन किसी कौए की मृत्यु हो जाती है उस दिन उसका कोई साथी भोजन नहीं करता है।

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10. कौआ अकेले में भोजन कभी नहीं खाता, वह किसी साथी के साथ ही मिल-बांटकर ही भोजन करता है।


11. कौए को भविष्य में घटने वाली घटनाओं का पहले से ही आभास हो जाता है।


12. कौए सर्वाहारी होते हैं, ये चाइनीस लोगों की तरह जो अच्छा लगे सब खा लेते हैं।


13. सबसे आश्चर्य की बात ये है कि जब कोई कौआ घायल होता है या मरने वाला होता है तो सारे कौवों का झुण्ड मिलकर उस पर हमला कर देते हैं और उसे जल्दी मार देते हैं।


14. अमरीकी यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन के शोधकर्ताओं का कहना है कि वे खुद के लिए खतरा पैदा करने वाले चेहरे को पांच साल तक याद रख सकते हैं।


दोस्तों कौवे के बारे में ये मजेदार जानकारी पढ़कर आपको निश्चित ही मजा आया होगा। ऐसी ही मज़ेदार बातें और कहानियां पढ़ने के लिए हमारे साथ जुड़े रहें। धन्यवाद!!!
********************
विश्वाश वह पक्षी है जो प्रभात के पूर्व अन्धकार में ही प्रकाश का अनुभव करता है और गाने लगता है।
_______रविंद्रनाथ टैगोर




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Friday, August 26, 2016

Inspiring Stories from the life of Abdul Kalam (in Hindi)




     डॉ कलाम की जीवन गाथा किसी रोचक उपन्यास के नायक की कहानी से कम नहीं है। चमत्कारिक प्रतिभा के धनी डॉ अब्दुल कलाम का व्यक्तित्व इतना उन्नत है कि इन्होंने सभी धर्म, जाति एवं सम्प्रदायों के व्यक्तियों का दिल जीत लिया है। यह एक ऐसे भारतीय हैं जो सभी के लिए ‘एक महान आदर्श’ हैं। आज हम आपको डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन से जुडी ऐसी कहानियाँ बताने जा रहे हैं, जिनको पढ़ने के बाद निश्चित ही आपके दिल में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के लिए सम्मान और बढ़ जाएगा।

"Humanity"

     

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने इमारत की दीवार पर  टूटे हुए शीशों के टुकड़े लगाने के सुझाव को ठुकरा दिया था। क्योकि इससे दीवार पर बैठने वाले पक्षियों को चोट लग सकती थी।

     यह बात उस समय की है, जब डॉ एपीजे अब्दुल कलाम डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन (DRDO) में काम कर रहे थे। तब भवन की सुरक्षा के लिए उनके साथ काम कर रहे अन्य लोगों ने इमारत की दीवार पर टूटे हुए शीशों के टुकड़े लगाने के बारे में सुझाव दिया। लेकिन जब यह बात डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को पता चली, तब उन्होंने ऐसा करने से सबको रोक। क्योकि ऐसा करने से, उस दीवार पर बैठने वाले पक्षी घायल हो सकते थे।

"Leadership"

     इस घोषणा के तुरंत बाद कि डॉ कलाम देश के अगले राष्ट्रपति हो सकते हैं, वह एक स्कूल में भाषण देने गए। वहाँ बिजली कट जाने के कारण, उन्होंने कैसे स्थिति को नियंत्रित किया।

     उस समय स्कूल में, लगभग 400 विद्यार्थी डॉ कलाम का भाषण सुनने आये थे, लेकिन तभी वहां बिजली चली गयी। लेकिन डॉ कलाम ने अपना भाषण नहीं रोका, वह भीड़ के बीच में चले गए और अपनी बुलंद आवाज में वहीं से अपना भाषण पूरा किया।    

"Humbleness"

     एक बार, जब कुछ युवाओं और किशोरों ने, राष्ट्रपति कलाम से मिलने का अनुरोध किया, तब राष्ट्रपति ने न केवल उन्हें अपना कीमती समय दिया, बल्कि उनके विचारों को गौर से सुना भी!

     एक बार जब राष्ट्रपति कार्यालय में, कुछ युवाओं ने देश के प्रथम नागरिक राष्ट्रपति कलाम से मिलने का अनुरोध किया। तब डॉ कलाम, न केवल उन बच्चों से राष्ट्रपति भवन के अपने निजी कक्ष में मिले, बल्कि उन्हें अपना कीमती समय भी दिया और साथ ही उनके विचारों को ध्यान से सुना भी। इसके बाद उन्होंने, बच्चों को विस्तार से जानकारी भी दी।  

"Charity"

     राष्टपति कलाम ने अपने जीवन भर की बचत और वेतन, एक संस्था PURA (जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है) को दे दिया।

     भारत सरकार, वर्तमान राष्ट्रपति के साथ-साथ सभी पूर्व राष्ट्रपति का ख्याल रखती है। इसलिए जब डॉ एपीजे अब्दुल कलाम, राष्ट्रपति बने तो उन्होंने अपने जीवनभर की कमाई, PURA नामक संस्था को दे दिया। डॉ कलाम ने  डॉ वर्गीज कुरियन (अमूल के संस्थापक) को फोन किया और यह पूछा कि अब मैं इस देश का राष्ट्रपति हूँ और भारत सरकार, मेरे जीवित रहने तक, मेरा ख्याल रखेगी, इसलिए मैं इस बचत और वेतन का क्या करूँगा?

"Gratitude"

     राष्ट्रपति कलाम ने, खुद अपने हाथों से धन्यवाद कार्ड लिखा!

     एक बार एक व्यक्ति ने डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का स्कैच बना कर उन्हें भेजा। उन्हें यह जान कर बहुत आश्चर्य हुआ कि डॉ कलाम ने खुद अपने हाथों से उनके लिए एक संदेश और अपना हस्ताक्षर करके एक थैंक यू कार्ड भेजा है।

"Common man"

     राष्ट्रपति कलाम ने राष्ट्रपति बनने के बाद केरल की अपनी पहली यात्रा के दौरान केरल राजभवन में किसे “राष्ट्रपति मेहमान ‘ के रूप में आमंत्रित किया?

     •सड़क के किनारे बैठने वाला मोची
     •छोटे से होटल के मालिक
यह कोई मजाक नहीं है। डॉ कलाम ने ऐसा किया था।



     डॉ कलाम ने विज्ञान के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कार्य किये,  जिसे हम भूल नहीं सकते। डॉ कलाम हम सभी के लिए आदर्श है। उनका जीवन कठिनाईओं से भरा था, लेकिन कभी भी उन्होंने हार नहीं मानी। किसी भी व्यक्ति ने डॉ कलाम को गुस्से में नहीं देखा और आज डॉ कलाम विश्व में विनम्रता के सबसे बड़े उदाहरण है।
********************
"सबसे उत्तम कार्य क्या होता है?किसी इंसान के दिल को खुश करना, किसी भूखे को खाना देना, जरूरतमंद की मदद करना, किसी दुखियारे का दुख हल्का करना और किसी घायल की सेवा करना..."
_____अब्दुल कलाम 


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Monday, August 22, 2016

संघर्ष से ही मिलती है सफलता


     स्वामी विवेकानंद ने कहा है कि दुनिया में तीन तरह के लोग होते हैं –

1 . ये वो हैं जो समय के साथ खुद को नहीं बदलते और पिछड़ जाते हैं।
2. ये वो लोग हैं जो समय के साथ खुद को बदल लेते हैं और आगे बड़ जाते हैं।
3. ये वो लोग हैं जो समय के अनुसार नहीं बदलते बल्कि समय को ही अपने अनुसार बदल देते हैं और इन्हीं को युगपुरुष कहा जाता हैं जो सदियों में एक बार जन्म लेते हैं।


     Andrew Carnegie ये नाम है उस शख्स का जिसे स्टील टाइकून (स्टील किंग) कहा जाता है। जो अपने धैर्य और परिश्रम की वजह से दुनियां के सबसे अमीर आदमी बने।

     इनका जन्म एक बहुत ही गरीब परिवार में हुआ था जिनके पास दो वक्त का खाना जुटाने के लिए भी पैसे नहीं थे और केवल एक कमरे का घर था। ये स्कॉटलैंड के रहने वाले थे लेकिन गरीबी और भुखमरी की वजह से ये लोग काम की तलाश में अमेरिका आ गए। घर की दरिद्रता की वजह से Andrew की पढ़ाई भी नहीं हो पायी और 13 साल की छोटी सी उम्र में घर का भार सँभालने की जिम्मेदारी इनके कन्धों पे आ गयी।

     13 साल के Andrew ने एक कपड़े बनाने की फैक्ट्री में छोटी सी नौकरी कर ली जहाँ उसे 12 घंटे और सातों दिन कठिन परिश्रम करना पढता, लेकिन जिस इंसान में लगन होती है वही कोयले से हीरा बनाने का माद्दा रखते हैं। Amdrew अपने काम से समय निकाल कर सफल लोगों की कहानियां पढता था उनसे प्रेरणा लेता था। धीरे -धीरे समय बीतता गया , Andrew ने कुछ दिन बाद एक पोस्टमैन की नौकरी भी की। शहर में बड़ी लाइब्रेरी थी जहाँ किताबों का विशाल संकलन था। Andrew वक्त निकाल कर लाइब्रेरी में पढता रहता था। यहाँ उसने कुछ इंटस्ट्री और बिज़निस के बारे में सीखा, नौकरी करते हुए कुछ पैसे इकट्ठे किये और धीरे धीरे स्टील बनाने वाली कम्पनीयों में इन्वेस्ट करने लगे जिससे उन्हें अच्छी इनकम हो जाती थी। इसी तरह समय का चक्र चलता गया और फिर Amdrew ने एक दिन अपनी खुद की कंपनी बनाने की सोची।

See also:-- असफलताओं से ही मिलती है सफलता की राह

     यही सोचकर Carnegie Steel Corporation नाम की एक कंपनी की स्थापना की। शुरुआत में कंपनी औसत रही लेकिन ये Andrew Carnegie की मेहनत और लगन का ही नतीजा था की कुछ ही सालो में Andrew स्टील किंग बन गए और बहुत जल्द उन्हें Builders of America का अवार्ड मिला। एक समय था जब Andrew  की अकेली कंपनी पूरे ब्रिटेन से ज्यादा स्टील उत्पादन करती थी और इसी लगन ने एक दिन Andrew को बना दिया "दुनिया का सबसे अमीर इंसान", 1889 में Andrew Carnegie को दुनिया का सबसे अमीर इंसान घोषित किया गया।

     अपनी लगन और परिश्रम से Andrew ने इतिहास को बदल कर रख दिया जिस व्यक्ति का परिवार एक समय भुखमरी से जूझा हो उसके लिए दुनिया का सबसे अमीर आदमी बनना एक मिशाल पेश करने से काम नहीं हैं।

     तो मित्रों दृंढ निश्चय और मेहनत से पहाड़ों का भी सीना चीरा जा सकता है बस जरुरत है अपने आत्मविश्वाश को जगाने की।
********************
आपको अपने भीतर से ही विकास करना होता है। कोई आपको सिखा नहीं सकता, कोई आपको आध्यात्मिक नहीं बना सकता आपको सिखाने वाला और कोई नहीं, सिर्फ आपकी आत्मा ही है।
                              -स्वामी विवेकानंद




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Friday, August 19, 2016

असफलताओं से ही मिलती है सफलता की राह !



     दोस्तों हम में से लगभग सभी अपने सपनो को, अपनी ख्वाहिशों को पूरा करना चाहते हैं और अपनी ज़िंदगी में सफल होना चाहते हैं। और इसके लिए हम मेहनत भी करते हैं। लेकिन क्या हम सभी अपने सपनो को पूरा कर पाते हैं, अपनी मेहनत में सफल हो पाते हैं ? ज्यादातर नहीं , क्योंकि यह इतना आसान नहीं होता है। अपने सपनो को पूरा करने के लिए, अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है, बहुत सी मुश्किलों, बाधाओं से होकर गुजरना पड़ता है और बहुत सी असफलताओ का सामना करना पड़ता है।

      कुछ लोग मुश्किलों, बाधाओं से घबराकर, असफलताओं से हार कर प्रयास करना छोड़ देते हैं। और कुछ लोग तो अपनी मंजिल के बेहद करीब पहुंचकर हार मान लेते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपनी मुश्किलों, बाधाओं को हराकर, अपनी असफलताओं से सीख लेकर अपनी मंजिल तक पहुँचते हैं और सफल होते हैं।

See also:-- संघर्ष से ही मिलती है सफलता

       ऐसे ही एक व्यक्ति के बारे में मैं यहाँ आपको बता रहा हूँ जिन्होंने हज़ारों असफलताओं के बाद भी बिना घबराये मेहनत की और सफल भी हुए। उनका नाम हैं थॉमस अल्वा एडिसन।

      थॉमस अल्वा एडिसन का जन्म 11 फ़रवरी 1847 को अमेरिका में हुआ था। बचपन में एक एक्सीडेंट में इन्होने अपने सुनने की क्षमता को आंशिक रूप से खो दिया था। कुछ नया करने की, कुछ नया सीखने की जिज्ञासा उनमे बचपन से थी। अपनी इसी जिज्ञासा के कारण एक दिन उन्होंने एक चिड़िया को कीड़े खाते हुए देखा और सोचा कि चिड़िया उड़ने के लिए कीड़ो को खाती है। इसके बाद एक दिन उन्होंने कुछ कीड़ो का मिश्रण बनाकर एक छोटी लड़की को इस सोच के साथ पिला दिया कि ये लड़की भी उड़ने लगेगी।  लड़की उडी तो नहीं बल्कि बुरी तरह बीमार पड़ गयी। इसके बाद उन्हें बहुत डाँट पड़ी। ऐसी ही अजीबोगरीब हरकतों के कारण लोग उन्हें मंदबुद्धि समझते थे और इसी कारण उन्हें स्कूल से भी निकल दिया था। लेकिन उनकी माँ ने उन्हें बहुत प्यार और संस्कार दिए जिससे वे मानसिक रूप से बहुत मजबूत हो गए। अपनी इन्ही अजीबो गरीब हरकतों और कुछ नया करने कि जिज्ञासा ने उन्हें बहुत बड़ा आविष्कारक बना दिया ।

     उन्होंने हज़ारो आविष्कार किये जिनमे कई बार वे सफल हुए तो बहुत बार असफल भी हुए। लेकिन अपनी असफलताओ से उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपनी मेहनत तथा जुझारूपन से उन्होंने सभी असफलताओ को मात देकर बहुत बड़े बड़े आविष्कार किये। उनका एक आविष्कार “बिजली के बल्ब का आविष्कार” एक महान आविष्कार साबित हुआ जिसने लोगो कि ज़िंदगी को ही बदल कर रख दिया।

See also:-- Life changing Story (in Hindi)

     बल्ब के आविष्कार से पहले एडिसन लगभग 1000 बार असफल हुए तब जाकर उन्हें सफलता मिली। बल्ब के फिलामेंट को बनाने के लिए उन्होंने घास के तिनके से लेकर सूअर के बाल तक पर लगभग 1000 प्रयोग किये जो असफल रहे। उसके बाद उन्हें फिलामेंट के लिए उपयुक्त पदार्थ मिला जिससे उन्होंने बल्ब का निर्माण कर पूरी दुनिया को रोशन कर दिया।

     दोस्तों एडिसन हज़ारो प्रयोगो के असफल होने के बाद भी निराश नहीं थे, थके हुए नहीं थे और घबराये हुए नहीं थे बल्कि खुश थे। एक बार उनसे किसी ने पूछा कि लगभग 1000 प्रयोगो में असफल होने के बाद आपको कैसा लगा था। तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया – मैं 1000 प्रयोगो में असफल हुआ ही नहीं था बल्कि मैंने 1000 ऐसी चीजों की खोज की जिनसे फिलामेंट नहीं बन सकता। इसे कहते हैं सकारात्मक सोच। उनके महान आविष्कारों के कारण उन्हें “आविष्कारों  का बादशाह” कहा जाता है। तो दोस्तों जब एक मंदबुद्धि बालक अपनी मेहनत, जुझारूपन और कुछ नया करने की जिज्ञासा के साथ तमाम विपरीत परिस्तिथियों , असफलताओं को हराकर एक महान वैज्ञानिक बन सकता है तो आप क्यों नहीं। इसीलिए कभी भी असफलताओं से डरे नहीं, मुश्किलों , बाधाओं से घबराये नहीं तथा सकारात्मक सोच के साथ मेहनत करते रहें। एक दिन आप देखेंगे कि आप तमाम मुश्किलों , बाधाओं, और असफलताओं को हराकर जीत गए हैं।
 ********************
आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत, असफलता नामक बीमारी को  मारने के लिए सबसे बढ़िया दवाई है। ये आपको एक सफल व्यक्ति बनाती है।
                       ______अब्दुल कलाम



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Thursday, August 18, 2016

रक्षाबन्धन की शुरुआत किसने की और क्यों ?

राखी सर्वप्रथम लक्ष्मी जी ने राजा बलि को बांधी थी



ये बात है तब की
जब दानबेन्द्र राजा बलि अश्वमेध यज्ञ करा रहे थे तब नारायण ने राजा बलि को छलने के लिये वामन अवतार लिया और तीन पग में सब कुछ ले लिया।

तब उसे भगवान ने पाताल लोक का राज्य रहने के लिये दे दिया

तब उसने प्रभु से कहा की कोई बात नहीं मैं पाताल लोक में रहने के लिये तैयार हूँ पर मेरी भी एक शर्त होगी

भगवान अपने भक्तों की बात कभी टाल नहीं सकते

बलि ने कहा ऐसे नहीं प्रभु आप छलिया हो पहले मुझे वचन दें कि जो माँगूगा वो आप दोगे

नारायण ने कहा दूँगा दूँगा दूँगा जब त्रिबाचा करा लिया तब बोले बलि कि मैं जब सोने जाऊँ तो जब उँठू तो जिधर भी नजर जाये उधर आपको ही देखूं

नारायण ने अपना माथा ठोका और बोले इसने तो मुझे पहरेदार बना दिया हैं ये सब कुछ हार के भी जीत गया है
पर कर भी क्या सकते थे वचन जो दें चुके थे

ऐसे होते होते काफी समय बीत गया
उधर बैकुंठ में लक्ष्मी जी को चिंता होने लगी नारायण के बिना

उधर नारद जी का आना हुआ

लक्ष्मी जी ने कहा नारद जी आप तो तीनों लोको में घूमते हैं क्या नारायण को कहीं देखा आपने

तब नारद जी बोले की पाताल लोक में हैं राजा बलि के पहरेदार बने हुये हैं

तब लक्ष्मी जी ने कहा मुझे आप ही राह दिखाये की कैसे मिलेंगे

तब नारद ने कहा आप राजा बलि को भाई बना लो और रक्षा का वचन लो और पहले तिर्बाचा करा लेना दक्षिणा में जो माँगूंगी वो देंगे और दक्षिणा में अपने नारायण को माँग लेना

लक्ष्मी जी सुन्दर स्त्री के भेष में रोते हुये पहुँची बलि ने कहा क्यों रो रहीं हैं आप

तब लक्ष्मी जी बोली की मेरा कोई भाई नहीं है, इसलिए मैं दुखी हूँ

तब बलि बोले की तुम मेरी धरम की बहिन बन जाओ और कलावा बँधवा कर रक्षा करने का वचन दिया और कुछ माँगने को कहा

तब लक्ष्मी जी ने तिर्बाचा कराया
और बोली मुझे आपका ये पहरेदार चाहिये

जब ये माँगा तो बलि पीटने लगे अपना माथा और सोचा धन्य हो माता पति आये सब कुछ ले गये और ये महारानी ऐसी आयी कि उन्हें भी ले गयी

तब से ये रक्षाबन्धन शुरू हुआ था
और इसीलिये कलावा बाँधते समय मंत्र बोला जाता है

येन बद्धो राजा बलि दानबेन्द्रो महाबला।
          तेन त्वाम प्रपद्यये रक्षे माचल माचल:।।

ये मंत्र हैं
रक्षा बन्धन अर्थात बह बन्धन जो हमें सुरक्षा प्रदान करे

सुरक्षा किससे

हमारे आंतरिक और बाहरी शत्रुओं से रोग ऋण से

राखी का मान करे

अपनी भाई बहन के प्रति प्रेम और सम्मान की भावना रखे।
********************





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Wednesday, August 17, 2016

Beauty and the Beast (in Hindi)



         एक समय की बात है, एक व्यापारी अपनी तीन बेटियों के साथ रहता था. व्यापारी को अपनी तीनो बेटियों से प्यार था. एक दिन उसे किसी काम से दूसरे देश जाना था, जाने से पहले व्यापारी ने अपनी तीनो बेटियों को अपने पास बुलाया और पूछा, “मेरी प्यारी बच्चियों, कहो मैं परदेस से तुम तीनों के लिए क्या लाऊं?”

         पहली बेटी ने सुन्दर कपडे और दूसरी बेटी ने गहने मंगवाए. तीसरी बेटी जिसका नाम ब्यूटी था, उसने अपने पिता से कहा कि वह उसके लिए एक गुलाब का फूल ले आये. व्यापारी ने अपनी तीनो बेटियों से उनके उपहार लाने का वादा किया और अपने सफर पर निकल पड़ा.

         अपना काम खत्म कर के व्यापारी जब अपने घर की ओर चला, तो वह तूफ़ान में फंस गया और रास्ते से भटक गया. बहुत कोशिशों के बाद भी वह अपने घर का रास्ता ना ढूंढ सका, तब तक तो अँधेरा भी हो चुका था. तभी अचानक उसकी नज़र एक रौशनी पर पड़ी जो दूर एक महल से आ रही थी. व्यापारी ने सोचा शायद महल में उसे रात बिताने की जगह मिल जाये, इसलिए वह उस तरफ चल पड़ा.

         जब व्यापारी महल में पंहुचा तो, महल में कोई भी नहीं था. उसने हर तरफ देखा लेकिन उसे महल में कोई नहीं मिला. आश्चर्य की बात थी कि खाने की मेज़ पर कई प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन रखे हुए थे, परन्तु उन्हें खाने वाला कोई नहीं दिख रहा था. भोजन को देख व्यापारी की भूख और बढ़ गयी थी, इसलिए उसने भर पेट खाना खाया और एक कमरे में मुलायम गद्दों पे सो गया. सुबह व्यापारी ने जब महल के बागीचे में सुन्दर गुलाब खिले देखे, तो उसे ब्यूटी से किया हुआ वादा याद आ गया. उसने एक फूल तोडा और घर की ओर जाने लगा तभी वहाँ एक भयानक जीव प्रकट हुआ और बोला,  “मैंने तुम्हे अपना भोजन खाने दिया, अपने मुलायम गद्दों पर सोने दिया और तुम मेरे ही बागीचे से गुलाब तोड़ रहे हो. तुम्हे इसकी सज़ा भुगतनी होगी.“ व्यापारी बहुत डर गया था, कांपते हुए बोला “मुझे माफ़ कर दो! माफ़ कर दो मुझे!! मुझे मत मारो. यह गुलाब मैंने अपने लिए नहीं तोड़ा, अपनी बेटी के लिए तोड़ा था. मैंने अपनी बेटी से वादा किया था कि मैं उसके लिए गुलाब का फूल लाऊंगा.” यह सुनते ही राक्षस ने व्यापारी से कहा कि वह एक शर्त पर उसे छोड़ेगा, उसे अपनी बेटी को महल में भेजना होगा. डरा और घबराया हुआ व्यापारी अपनी बेटी को भेजने का वादा कर वहां से चला गया.

         घर पहुँच कर व्यापारी ने अपनी बेटियों को सारी बात बताई और ब्यूटी से माफ़ी मांगते हुए कहा, “अपनी जान बचाने के लिए मुझे उस समय कुछ समझ नहीं आया और मैं राक्षस से यह वादा कर आया. मुझे माफ़ कर दो ब्यूटी! अपने स्वार्थी पिता को माफ़ कर दो!!” ब्यूटी ने अपने पिता के गले लगते हुए तसल्ली दी, ” आप बिलकुल परेशान ना हों पिताजी, मैं आपका किया हुआ वादा ज़रूर निभाऊंगी.”

         ब्यूटी जब महल पहुंची तो बहुत घबराई हुई थी, राक्षस का भयानक चेहरा देख कर वह बहुत डर गयी. लेकिन राक्षस ने उसका खुले दिल से स्वागत किया. राक्षस ने उसे रहने के लिए अपने महल का सबसे अच्छा कमरा दिया और जब ब्यूटी आग के सामने बैठ कर कढ़ाई करती तब राक्षस उसके पास घंटों तक बैठा रहता और उसे निहारता रहता. धीरे-धीरे दोनों को एक दुसरे का साथ अच्छा लगने लगा और वे अच्छे दोस्त बन गए. अब वह दोनों सारा सारा दिन एक दूसरे से बातें करते और खुश रहते. राक्षस को ब्यूटी बहुत अच्छी लगती थी और वह उससे शादी करना चाहता था, लेकिन डरता था कि ब्यूटी एक राक्षस से कभी शादी नहीं करना चाहेगी. बड़ी हिम्मत जुटा कर एक दिन उसने ब्यूटी से अपने दिल की बात कहने का फैसला किया. जब वह ब्यूटी के पास पहुंचा तो देखा कि ब्यूटी अपने पिता को याद करके बहुत उदास है. उससे ब्यूटी की उदासी देखी नहीं गयी और उसने ब्यूटी को एक जादुई शीशा दिया जिससे वह अपने पिता को देख सके. ब्यूटी बहुत खुश हुई, लेकिन जब उसने अपने पिता को देखा तो वह बहुत बीमार थे. यह देख ब्यूटी ने राक्षस से अपने पिता से मिलने की इच्छा जताई. राक्षस ने उसे पिता से मिलने की इजाज़त दे दी और सात दिन में वापिस आने को कहा . ब्यूटी ने तय समय में आने का वादा किया और अपने घर चली गयी. ब्यूटी को सामने देख व्यापारी खुश हो गया और जैसे जैसे उसे पता चला कि राक्षस देखने में भले ही क्रूर हो लेकिन वह दिल का बहुत ही नेक और दयालु है, व्यापारी की सेहत और सुधरती गयी. परिवार से मिलने की खुशी में सात दिन कब निकल गए, ब्यूटी को पता ही नहीं चला.

         एक दिन ब्यूटी ने सपना देखा कि राक्षस की हालत बहुत खराब है और जल्दी ही मरने वाला है. अगले ही दिन वह महल वापस आ गयी और उसने पाया कि राक्षस बगीचे में बेसुध पड़ा हुआ था जैसे वह मर चुका हो. ब्यूटी उसे देखते ही रो पड़ी, “तुम मुझे छोड़ कर मत जाओ, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ और तुमसे शादी करना चाहती हूँ. मैं अपनी सारी ज़िन्दगी तुम्हारे साथ बिताना चाहती हुँ.” जैसे ही ब्यूटी ने यह शब्द कहे, एक रौशनी ने राक्षस को ढक लिया, और जब रौशनी गायब हुई तो भयानक और क्रूर दिखने वाला राक्षस एक खूबसूरत राजकुमार में बदल चुका था. राजकुमार ने बताया कि एक दुष्ट जादूगरनी ने उसे एक राक्षस बना दिया था और सच्चे प्यार से ही उस जादू को तोडा जा सकता था. बहुत समय से राजकुमार उस लड़की को ढूंढ रहा था, जो उससे उस रूप में प्यार करे जिससे सब डरते थे, जो उसकी सूरत से नहीं बल्कि उसके गुणों को चाहे. आखिरकार राजकुमार को उसका सच्चा प्यार मिल गया और वह बहुत खुश था. जल्द ही ब्यूटी और राजकुमार की शादी हो गयी और वह अपनी गुलाबों सी खूबसूरत दुनिया में हसी खुशी रहने लगे.

"शिक्षा – इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें किसी की सूरत को देखकर उसकी सीरत का अंदाजा नहीं लगाना चाहिए. इन्सान का बाहरी रूप सिर्फ दिखावा है, उसका साफ दिल, उसके गुण देखकर इन्सान से प्यार किया जाता है।"
********************
कभी-कभार लोग सुन्दर होते हैं।दिखने में नहीं। इसमें नहीं कि वे क्या कहते हैं। बस इसमें जोकि वे हैं। 
_______मार्कस ज़ुकस 



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Tuesday, August 16, 2016

Life Changing Quotes



==> जब लोग आपको Copy करने लगें तो समझ लेना जिंदगी में Success हो रहे हो !

==> कमाओ…कमाते रहो और तब तक कमाओ, जब तक महंगी चीज सस्ती न लगने लगे !

==> जिस व्यक्ति का लालच खत्म, उसकी तरक्की भी खत्म !

==> यदि “Plan A” काम नही कर रहा, तो कोई बात नही  25 और  Letters बचे हैं उन पर Try करों !

==> जिस व्यक्ति ने कभी गलती नहीं कि उसने कभी कुछ नया करने की कोशिश नहीं की !

==> भीड़ हौंसला तो देती हैं लेकिन पहचान छिन लेती हैं !

==> अगर किसी चीज़ को दिल से चाहो तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने में लग जाती हैं !

==> कोई भी महान व्यक्ति अवसरों की कमी के बारे में शिकायत नहीं करता !

==> महानता कभी ना गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठ जाने में है !

==> जिस चीज में आपका Interest हैं उसे करने का कोई टाईम फिक्स नही होता. चाहे रात के 1 ही क्यों न बजे हो !

==> अगर आप चाहते हैं कि, कोई चीज अच्छे से हो तो उसे खुद कीजिये !

==> सिर्फ खड़े होकर पानी देखने से आप नदी नहीं पार कर सकते !

==> जीतने वाले अलग चीजें नहीं करते, वो चीजों को अलग तरह से करते हैं !

==> जितना कठिन संघर्ष होगा जीत उतनी ही शानदार होगी !

==> यदि लोग आपके लक्ष्य पर हंस नहीं रहे हैं तो समझो आपका लक्ष्य बहुत छोटा हैं !

==> विफलता के बारे में चिंता मत करो, आपको बस एक बार ही सही होना हैं !

==> सबकुछ कुछ नहीं से शुरू हुआ था !

==> हुनर तो सब में होता हैं फर्क बस इतना होता हैं किसी का छिप जाता हैं तो किसी का छप जाता हैं !

==> दूसरों को सुनाने के लिऐ अपनी आवाज ऊँची मत करिऐ, बल्कि अपना व्यक्तित्व इतना ऊँचा बनाऐं कि आपको सुनने की लोग मिन्नत करें !

==> अच्छे काम करते रहिये चाहे लोग तारीफ करें या न करें आधी से ज्यादा दुनिया सोती रहती है ‘सूरज’ फिर भी उगता हैं !

==> पहचान से मिला काम थोडे बहुत समय के लिए रहता हैं लेकिन काम से मिली पहचान उम्रभर रहती हैं !

==> जिंदगी अगर अपने हिसाब से जीनी हैं तो कभी किसी के फैन मत बनो !

==> जब गलती अपनी हो तो हमसे बडा कोई वकील नही जब गलती दूसरो की हो तो हमसे बडा कोई जज नही !

==> आपका खुश रहना ही आपका बुरा चाहने वालो के लिए सबसे बडी सजा हैं !

==> कोशिश करना न छोड़े, गुच्छे की आखिरी चाबी भी ताला खोल सकती हैं !

==> इंतजार करना बंद करो, क्योकिं सही समय कभी नही आता !

==> जिस दिन आपके Sign Autograph में बदल जाएंगे, उस दिन आप बड़े आदमी बन जाओगें !

==> काम इतनी शांति से करो कि सफलता शोर मचा दे !

==> तब तक पैसे कमाओ जब तक तुम्हारा बैंक बैलेंस तुम्हारे फोन नंबर की तरह न दिखने लगें !

==> अगर एक हारा हुआ इंसान हारने के बाद भी मुस्करा दे तो जीतने वाला भी जीत की खुशी खो देता हैं. ये हैं मुस्कान की ताकत !
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Sunday, August 14, 2016

15 अगस्त को आजाद हुए थे 3 और देश

स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं


     अंग्रेजों की 200 सालों की गुलामी के बाद भारत को आखिरकार आजादी तो मिल गई, लेकिन क्‍या आपको पता है 15 अगस्‍त की तारीख को केवल भारत ही नहीं बल्‍कि दुनिया के तीन और देशों को भी आजादी मिली थी।

      ये तीन देश थे। दक्षिण कोरिया, बहरीन, और कांगो।
दरअसल, दुनिया के अलग-अलग जगह बसे इन देशों को भी आजादी इसी दिन मिली। इसमें दक्षिण कोरिया को 15 अगस्‍त 1945 में जापान से आजादी मिली, जबकि बहरीन को 15 अगस्‍त 1971 को ब्रिटेन से वहीं दूसरी ओर 15 अगस्‍त 1960 को फ्रांस ने कांगो को आजाद किया।

     यही नहीं इसमें भी बड़ी चौंकाने वाली बात यह है कि ब्रिटेन तो भारत को 1947 को नहीं बल्‍कि उसके अगले साल 1948 में आजाद करना चाहता था, लेकिन महात्‍मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन से अंग्रेज इतने परेशान हो चुके थे कि उन्‍होंने भारत को एक साल पहले ही यानी की 15 अगस्‍त 1947 को ही आजाद करने के विचार पर फैसला ले लिया।

     आज़ादी के 69 साल बाद भी हमारे देश का नागरिक आज़ाद नहीं है। देश आज़ाद हो गया लेकिन देशवासी आज भी बेड़ियों के बंधन में बंधे हैं। ये बेड़ियां अज्ञानता की, जातिवाद की, धर्म की, आरक्षण की, गरीबी की, सहनशीलता की, मिथ्या अवधारणाओं की आदि हैं।

     आज हमारा भारत आज़ाद है तो इस आज़ाद भारत के लिए हमारा भी तो कुछ फ़र्ज़ बनता है इसके लिए कुछ करने का। कुछ ऐसा करो जिससे हमें खुद पर गर्व हो। क्या सिर्फ whatsapp, facebook, twitter पर पोस्ट करके   हमने अपना देश प्रेम निभा दिया।

     बलिदान ना सही पर हम इन छोटे कामों मे से एक तो कर सकते है:-
1. कचरा सड़क पर ना फेके
2. सड़कों पर पान तंबाकू ना थूकें
3. नोटो पर दीवारों पर ना लिखे
4. गाली देना छोड़ दें
5. पानी लाइट बचाएं
6. एक पौधा लगाएं
7. किसी भी धर्म पर टिप्पणी न करे
8. ट्राफीक रूल्स ना तोड़े
9. रोज़ माता पिता का आशीर्वाद ले
10. लड़कियों की इज्जत करे

जो करें दिल से करे.....

बदलना है तो खुद को बदलो whatsapp और facebook की फ़ोटो तो सभी बदल लेते है।
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Saturday, August 13, 2016

पेड़ का रहस्य



शहर के बाहरी हिस्से में मल्टी नेशनल कम्पनी में काम करने वाले एक सेल्स मैनेजर अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहते थे। वह रोज सुबह काम पर निकल जाते और देर शाम को घर लौटते।

एक बार कुछ चोरों ने मैनेजर के घर में चोरी करने का मन बनाया। चोरी करने के दो-चार दिन पहले से ही वे उनके घर के आस-पास चक्कर लगाने लगे और उनकी गतिविधियों पर नज़र रखने लगे।

एक दिन चोरों ने एक अजीब सी चीज देखी। मैनेजर साहब जब शाम को लौटे तो वह घर में घुसने से पहले बागीचे में लगे आम के पेड़ के पास जाकर खड़े हो गए। उसके बाद उन्होंने अपने बैग में से एक-एक करके कुछ निकाला और पेड़ में कहीं डाल दिया। चूँकि उनकी पीठ चोरों की तरफ थी इसलिए वे ठीक से देख नहीं पाए कि आखिर मैनेजर ने क्या निकाला और कहाँ डाला।

खैर! इतना देख लेना ही चोरों के लिए काफी था। उनकी आँखें चमक गयीं; उन्होंने सोचा कि ज़रूर मैनेजर ने वहां कोई कीमती चीज या पैसे छुपाये होंगे।

मैनेजर के अन्दर जाते ही चोर थोड़ा और अँधेरा होने का इंतज़ार करने लगे और जब उन्हें तसल्ली हो गयी कि मैनेजर साहब खा-पीकर सो गए हैं तो वे धीरे से बाउंड्री कूद कर उनके घर में दाखिल हुए।

बिना समय गँवाए वे आम के पेड़ के पास गए और मैनेजर साहब की छिपाई चीज ढूँढने लगे। चोर हैरान थे, बहुत खोजने पर भी उन्हें वहां कुछ नज़र नहीं आ रहा था..वे समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर मैनेजर ने किस चतुराई से चीजें छिपाई हैं कि इतने शातिर चोरों के खोजने पर भी वे नहीं मिल रही हैं!

अंत में हार मान कर चोर वहां से चले गए। अगले दिन वे फिर छिपकर मैनेजर के ऑफिस से लौटने का इंतज़ार करने लगे।

रोज की तरह मैनेजर साहब देरी से घर लौटे। आज भी वे घर में घुसने से पहले उसी आम के पेड़ के पास गए और अपने बैग से कुछ चीजें निकाल कर उसमे डाल दी।

एक बार फिर चोर सबके सो जाने पर पेड़ के पास गए और जी-जान से खोजबीन करने लगे। पर आज भी उनके हाथ कुछ नहीं लगा।

अब चोरों को कीमती सामान से अधिक ये जानने की जिज्ञासा होने लगी कि आखिर वो मैनेजर किस तरह से चीजों को छिपता है कि लाख ढूँढने पर भी वो नहीं मिलतीं।

अपनी इसी जिज्ञासा को शांत करने के लिए वे सन्डे की सुबह शरीफों की तरह तैयार हो कर मैनेजर साहब से मिलने पहुंचे।

उनका लीडर बोला, “ सर, देखिये बुरा मत मानियेगा…दरअसल हम लोग चोर हैं! हम लोग कई दिन से आपके मकान में चोरी करने का प्लान बना रहे थे..लेकिन जब एक दिन हमने देखा कि आप ऑफिस से लौट कर आम के पेड़ में कुछ छुपा रहे हैं तो हमे लगा कि बस काम हो गया…हम आराम से आपकी छुपायी चीज लेकर गायब हो जायेंगे और चोरी का माल आपस में बाँट लंगे…पर पिछली दो रात हम सोये नहीं और सारी कोशिशें करके देख लीं कि वो चीजें हमें मिल जाएं; पर अब हम हार मान चुके हैं…कृपया आप ही हमें इस पेड़ का रहस्य बता दें!”

उनकी बात सुनकर मैनेजर साहब जोर से हँसे और बोले, “अरे भाई! मैं वहां कुछ नहीं छिपाता!”

“फिर आप रोज शाम को बैग से निकाल कर वहां क्या डालते हैं?”, लीडर ने आश्चर्य से पूछा।

“देखो!”, मैनेजर साहब गंभीर होते हुए बोले, “ मैं एक प्राइवेट जॉब में हूँ…वो भी सेल्स की…मेरे काम में इतना प्रेशर होता है, इतनी स्ट्रेस होती है कि तुम लोग उसका अंदाजा भी नहीं लगा सकते! रोज किसी नाराज़ कस्टमर के ताने सहने पड़ते हैं…रोज सेल्स टारगेट को लेकर बॉस क्लास लगाता है…रोज ऑफिस पॉलिटिक्स के कारण दिमाग खराब होता है…मैं नहीं चाहता कि इन सब निगेटिव बातों का असर मेरे प्यारे बच्चों और परिवार पर पड़े! इसलिए जब मैं शाम को इन तमाम चीजों को लेकर लौटता हूँ तो घर में घुसने से पहले मैं इन्हें एक-एक करके इस आम के पेड़ पर टांग देता हूँ…और कमाल की बात ये है कि जब मैं अगली सुबह इन चीजों को पेड़ से उठाने आता हूँ तो आधी तो पहले ही गायब हो चुकी होती हैं, यानी मैं उन्हें भूल चुका होता हूँ…और जो बचती हैं मैं उन्हें अपने साथ लेता जाता हूँ…”

चोर अब पेड़ का रहस्य समझ चुके थे; वे चोरी में तो कामयाब नहीं हुए लेकिन आज एक बड़ी सीख लेकर घर लौट रहे थे!

दोस्तों, ना जाने क्यों इंसान अपनी life को खुद ही tough बनाता चला जा रहा है। पहले के लोग जहाँ सुख-सुविधाओं के कम होने पर भी खुश रहते थे…tension free रहते थे, आज सब कुछ होने पर भी हम एक stressful life जी रहे हैं। इस condition को रातों-रात बदला तो नहीं जा सकता पर एक काम जो हम तुरंत कर सकते हैं वो है अपनी स्ट्रेस का असर अपने परिवार पे ना पड़ने देना।

आपने कई बार सुना भी होगा…office को office में रहने दो घर मत लाओ! शायद पेड़ का ये रहस्य आपको इस बात को अमल करने में मदद करे! तो चलिए, अपने आप से एक वादा करिए कि आज से आप भी बाहर की tension को घर में enter नहीं करने देंगे और ना ही उसका असर अपने behaviour पर आने देंगे…आज से आप भी अपनी negativity को घर के बाहर कहीं टांग आयेंगे।
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"हमेशा याद रखो, आप अपनी प्रॉब्लम से कई गुना बड़े हो।"
_____संदीप माहेश्वरी




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Friday, August 12, 2016

जीवन का मूल्य



एक आदमी ने गौतम बुद्ध  से पुछा : जीवन का मूल्य क्या है?

बुद्ध  ने उसे एक पत्थर दिया और कहा : जा और इस पत्थर  का मूल्य पता करके आ , लेकिन ध्यान रखना पत्थर को बेचना नही है।

वह आदमी पत्थर को बाजार मे एक संतरे वाले के पास लेकर गया और बोला : इसकी कीमत क्या है?

संतरे वाला चमकीले पत्थर को देखकर बोला, "12 संतरे लेजा और इसे मुझे दे जा"

आगे एक सब्जी वाले ने उस चमकीले पत्थर को देखा और कहा "एक बोरी आलू ले जा और इस पत्थर को मेरे पास छोड़ जा"

आगे एक सोना बेचने वाले के पास गया उसे पत्थर दिखाया सुनार उस चमकीले पत्थर को देखकर बोला,  "50 लाख मे बेच दे"।

उसने मना कर दिया तो सुनार बोला "2 करोड़ मे दे दे या बता इसकी कीमत जो माँगेगा वह दूँगा तुझे..

उस आदमी ने सुनार से कहा मेरे गुरू ने इसे बेचने से मना किया है।

आगे हीरे बेचने वाले एक जौहरी के पास गया उसे पत्थर दिखाया।

जौहरी ने जब उस बेसकीमती रुबी को देखा , तो पहले उसने रुबी के पास एक लाल कपडा बिछाया फिर उस बेसकीमती रुबी की परिक्रमा लगाई माथा टेका।

फिर जौहरी बोला , "कहा से लाया है ये बेसकीमती रुबी? सारी कायनात , सारी दुनिया को बेचकर भी इसकी कीमत नही लगाई जा सकती ये तो बेसकीमती है।"

वह आदमी हैरान परेशान होकर सीधे बुद्ध  के पास आया।

अपनी आप बिती बताई और बोला "अब बताओ भगवान , मानवीय जीवन का मूल्य क्या है?

 बुद्ध  बोले : संतरे वाले को दिखाया उसने इसकी कीमत "12 संतरे" की बताई।

सब्जी वाले के पास गया उसने इसकी कीमत "1 बोरी आलू" बताई।

आगे सुनार ने "2 करोड़" बताई और जौहरी ने इसे "बेसकीमती" बताया।

अब ऐसा ही मानवीय मूल्य का भी है।

तू बेशक हीरा है..!!लेकिन, सामने वाला तेरी कीमत, 
अपनी औकात - अपनी जानकारी -  अपनी हैसियत से लगाएगा। 

घबराओ मत दुनिया में.. तुझे पहचानने वाले भी मिल जायेगे।

"Respect Yourself, You are very Unique."

Thursday, August 11, 2016

The Secret of Success सफलता का रहस्य



       एक बार की बात है किसी शहर में एक लड़का रहता था जो बहुत गरीब था। मेंहनत मजदूरी करके बड़ी मुश्किल से 2 वक्त का खाना जुटा पाता । एक दिन वह किसी बड़ी कंपनी में चपरासी के लिए इंटरव्यू देने गया । बॉस ने उसे देखकर उसे काम दिलाने का भरोसा जताया ।

       जब बॉस ने पूछा -“तुम्हारी email id क्या है”? लड़के ने मासूमियत से कहा कि उसके पास email id नहीं है ।  
 ये सुनकर बॉस ने उसे बड़ी घृणा दृष्टि से देखा और कहा कि आज दुनिया इतनी आगे निकल गयी है , और एक तुम हो कि email id तक नहीं है , मैं तुम्हें नौकरी पर नहीं रख सकता ।


       ये सुनकर लड़के के आत्मसम्मान को बहुत ठेस पहुंची , उसकी जेब में उस समय 50 रुपये थे । उसने उन 50 रुपयों से 1 किलो सेब खरीदे और अपने घर चलता बना। वह घर घर जाकर उन सेबों को बेचने लगा और ऐसा करके उसने 80 रुपये जमा कर लिए । अब तो लड़का रोज सेब खरीदता और घर घर जाकर बेचता । सालों तक यही सिलसिला चलता रहा लड़के की कठिन मेहनत रंग लायी और एक दिन उसने खुद की कंपनी खोली जहाँ से विदेशों में सेब सप्लाई किये जाते थे । उसके बाद लड़के ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और जल्दी ही बहुत बड़े पैमाने पर अपना बिज़नेस फैला दिया और एक सड़क छाप लड़का बन गया करोड़पति।

       एक दिन कुछ मीडिया वाले लड़के का इंटरव्यू लेने आये और अचानक किसी ने पूछ लिया – “सर आपकी email id क्या है”??
       लड़के ने कहा -“नहीं है “, ये सुनकर सारे लोग चौंकने लगे कि एक करोड़पति आदमी के पास एक “email id” तक नहीं है। लड़के ने हंसकर जवाब दिया -“मेरे पास email id नहीं है इसीलिए मैं करोड़पति हूँ , अगर email id होती तो मैं आज एक चपरासी होता”।


       मित्रों ,इसीलिए कहा जाता है कि हर इंसान के अंदर कुछ ना कुछ खूबी जरूर होती है, भीड़ के पीछे भागना बंद करो और अपने टेलेंट और स्किल को पहचानो । दूसरों से अपनी तुलना मत करो कि उसके पास वो है मेरे पास नहीं है , जो कुछ तुम्हारे पास है उसे लेकर आगे बढ़ो फिर दुनियां की कोई ताकत तुम्हें सफल होने से नहीं रोक सकती।
********************
"लगातार प्रयत्न करने वाले लोगों की गोद में सफलता स्वयं आकर बैठ जाती हैं।"
_______भारवि




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Wednesday, August 10, 2016

फेसबुक ID ब्लॉक होने से कैसे बचाये



दोस्‍तो हम में सेे कई लोगों की यह समस्‍या आती हैै कि फेसबुक हमारी आईडी ब्‍लॉक कर देेता हैै। एक बार अगर फेेसबुक नें ID ब्‍लॉक कर दी तो दोबारा उसे अनब्‍लॉक करवाना मुश्किल होता हैै। आज हम इसी विषय पर चर्चा करेंगें कि अाखिर फेसबुक हमारी आईडी ब्‍लॉक क्‍यों करता हैै। आइये जानते हैं।


1- दोस्‍तो फेसबुक की एक पॉलिसी है जिसके तहत हम फेसबुक पर फर्जी अकाउण्‍टस नही बना सकते। फेसबुक हमे रीकमाण्‍ड करता है कि हम अपना वास्तिवक नाम ही फेसबुक प्रोफाइल पर लगाऐं। लेकिन आप लोग कहोगे कि फेसबुक को कैैसे पता कि हम फर्जी नाम से आई डी चला रहे हैं तो आपको बता दूॅ कि शुरूआत में फेसबुक को पता नही चलता कि आप फर्जी अकाउण्‍टस चला रहे हैं लेकिन धीरे धीरे आपकी गतिविधियों से फेसबुक की ट्रैैकिंग टीम यह जान लेती है कि आप फर्जी अकाउण्‍टस चला रहे हो और फिर वो आपका अकाउण्‍ट ब्‍लॉक कर देती हैै।


2- फेसबुक की दूसरी पा‍ॅॅलिसी यह है कि आप सिर्फ उन्‍ही लोगों को फ्रेण्‍ड रिक्‍वेस्‍ट भेज सकते हो जिन्‍हे आप रियल लाइफ में भी जानते हो। यहॉ सबसे बडा ख्‍ातरा होता है। क्‍योंकि हम भारतीय फेसबुक पर किसी को भी फ्रेन्‍ड रिक्‍वेस्‍ट भेज देते हैं। इस बात का पता फेसबुक चुुटकियों में लगा लेती हैै। होता कुछ यू हैं कि जब आप धडाधड फ्रेन्‍ड रिक्‍वेस्‍ट भेजते हो तो फेसबुक कुछ फेक अकाण्‍उट जनरेट करके आपके बीच रख देता हैै। जो वास्‍तव में किसी के नही होतेे। और आप उनपर भी फ्रेेण्‍ड रिक्‍वेस्‍ट भेज देेते हो। तो फेसबुक को लगता है कि आप फेसबुक की पॉलिसी को तोड रहे हो। इसके अलावा जब आप धडाधड फेसबुक पर फ्रेन्‍ड रिक्‍वेस्‍ट भेजते हो तो फेसबुक यह भी समझता हैै कि कोई रोबोट या सॉफ्टवेयर के जरिये ऐसा कर रहे हैै और उस आईडी को तुरन्‍त ब्‍लॉक कर देेती हैै।


3- फेसबुक में एक विकल्‍प है रिपोर्ट करनें का। जी हॉ अगर आपको किसी अकाउण्‍ट से कोई आपत्ति है तो आप उसकी रिपोर्ट फेसबुक में कर सकते हो। और फेसबुक उस पर एक्‍शन ले लेता है। इसलिये फेसबुक पर ऐसी कोई भी सामग्री न डालें या ऐसा कोई काम न करें जिससे किसी को कोई अापत्ति हो।


4- कोई भी ऐसा लिंक शेयर न करें जो कि फेसबुक नें बैन कर रखा हो या फिर फ्रॉड लिंक हो। अगर आप एेेसा करते हो तो भी फेसबुक आपकी आईडी बन्‍द कर सकता हैै।


5- समान पोस्‍ट दोहरानें से बचें। यदि आप CHAMPCASH या किसी और बिजनिस का प्रचार कर रहे हो तो ध्‍यान रखें। एक सी पोस्‍ट ही हर बार कॉपी पेस्‍ट न करें। इससे ब्‍लॉक होनें का ख्‍ातरा बढ जाता हैै। अगर आप अलग अलग ग्रुप मे पोस्टिंंग कर रहे हैै तो हर 10 ग्रु्प में पो‍स्‍ट करनेंं के बाद मैटर बदल दें।


6-  ध्‍यान रखें लगातार किसी को फ्रेन्‍ड रिक्‍वेस्‍ट न भेजें और न ही एक ही दिन में बहुत सारें ग्रुप ज्‍वाइन करें। इससे फेसबुक का सॉफ्टवेयर भ्रमित होकर आपको रोबोट समझ लेेता हैै और आपकी आई डी बंद कर देता है।


दोस्तों इन बातों का ध्यान रखे और अपनी Facebook ID ब्लाक होने से बचाएं।
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Tuesday, August 9, 2016

Best lines



=> बारिश के दौरान सारे पक्षी आश्रय की तलाश करते हैं लेकिन बाज़ बादलों के ऊपर उडकर बारिश को ही अवॉयड कर देते है।
समस्याए कॉमन हैं, लेकिन आपका एटीट्यूड इसमें डिफरेंस पैदा करता है।
                                -अब्दुल कलाम

=> आपको अपने भीतर से ही विकास करना होता है। कोई आपको सिखा नहीं सकता, कोई आपको आध्यात्मिक नहीं बना सकता आपको सिखाने वाला और कोई नहीं, सिर्फ आपकी आत्मा ही है।
                                -स्वामी विवेकानंद

=>आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत, असफलता नामक बीमारी को  मारने के लिए सबसे बढ़िया दवाई है। ये आपको एक सफल व्यक्ति बनाती है।
                                -अब्दुल कलाम

=> विपरीत परस्थितियों में कुछ लोग टूट जाते हैं, तो कुछ लोग लोग रिकॉर्ड तोड़ देते हैं।
                                -शिव खेड़ा

=> आप अपना भविष्य नहीं बदल सकते पर आप अपनी आदते बदल सकते हैं और निश्चित रूप से आपकी आदतें आपका भविष्य बदल देगी।
                                -अब्दुल कलाम

=> अगर आप सोचते हैं कि आप कर सकते हैं, तो आप कर सकते हैं। अगर आप सोचते हैं कि आप नहीं कर सकते हैं, तो आप नहीं कर सकते हैं।
                                -शिव खेड़ा

=> मैं अकेली हूँ, लेकिन फिर भी मैं हूँ। मैं सबकुछ नहीं कर सकती, लेकिन मैं कुछ तो कर सकती हूँ और सिर्फ इसलिए कि मैं सब कुछ नहीं कर सकती, मैं वो करने से पीछे नहीं हटूंगी जो मैं कर सकती हूँ।
                                -हेलेन किलर
                   
=> किसी  दिन, जब  आपके  सामने कोई समस्या  ना  आये तो आप  सुनिश्चित  हो  सकते  हैं  कि  आप  गलत  मार्ग  पर  चल  रहे  हैं।
                                -स्वामी विवेकानंद

=> किसी डिग्री का ना होना दरअसल फायेदेमंद है, अगर आप इंजिनियर या डाक्टर हैं तब आप एक ही काम कर सकते हैं पर यदि आपके पास कोई डिग्री नहीं है, तो आप कुछ भी कर सकते हैं।
                                -शिव खेड़ा
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दुनिया के 7 आश्चर्य




गाँव के स्कूल में पढने वाली छुटकी आज बहुत खुश थी, उसका दाखिला शहर के एक अच्छे  स्कूल में क्लास 6 में हो गया था।

आज स्कूल का पहला दिन था और वो समय से पहले ही तैयार हो कर बस का इंतज़ार कर रही थी। बस आई और छुटकी बड़े उत्साह के साथ उसमे सवार हो गयी।

करीब 1 घंटे बाद जब बस स्कूल पहुंची तो सारे बच्चे उतर कर अपनी-अपनी क्लास में जाने लगे…छुटकी भी बच्चों से पूछते हुए अपनी क्लास में पहुंची।


क्लास के बच्चे गाव से आई इस लडकी को देखकर उसका मजाक उड़ाने आगे।

“साइलेंस!”, टीचर बोली, “ चुप हो जाइए आप सब…”

“ये छुटकी है, और आज से ये आपके साथ ही पढेगी।”

उसके बाद टीचर ने बच्चों को सरप्राइज टेस्ट के लिए तैयार होने को कह दिया।

“चलिए, अपनी-अपनी कॉपी निकालिए और जल्दी से “दुनिया के 7 आश्चर्य लिख डालिए।”, टीचर ने निर्देश दिया।

सभी बच्चे जल्दी जल्दी उत्तर लिखने लगे, छुटकी भी धीरे-धीरे अपना उत्तर लिखने लगी।

जब सबने अपनी कॉपी जमा कर दी तब टीचर ने छुटकी से पूछा, “क्या हुआ बेटा, आपको जितना पता है उतना ही लिखिए, इन बच्चों को तो मैंने कुछ दिन पहले ही दुनिया के सात आश्चर्य बताये थे।”

“जी, मैं तो सोच रही थी कि इतनी सारी चीजें हैं…इनमे से कौन सी सात चीजें लिखूं….”, छुटकी टीचर को अपनी कॉपी थमाते हुए बोली।


टीचर ने सबकी कापियां जोर-जोर से पढनी शुरू कीं..ज्यादातर बच्चों ने अपने उत्तर सही दिए थे…

=> ताजमहल
=> चीचेन इट्ज़ा
=> क्राइस्ट द रिडीमर की प्रतिमा
=> कोलोसियम
=> चीन की विशाल दीवार
=> माचू पिच्चू
=> पेत्रा

टीचर खुश थीं कि बच्चों को उनका पढ़ाया याद था। बच्चे भी काफी उत्साहित थे और एक दुसरे को बधाई दे रहे थे…

अंत में टीचर ने छुटकी की कॉपी उठायी, और उसका उत्तर भी सबके सामने पढना शुरू किया….

दुनिया के 7 आश्चर्य हैं:

=> देख पाना
=> सुन पाना
=> किसी चीज को महसूस कर पाना
=> हँस पाना
=> प्रेम कर पाना
=> सोच पाना
=> दया कर पाना

छुटकी के उत्तर सुन पूरी क्लास में सन्नाटा छा गया। टीचर भी आवाक खड़ी थी….आज गाँव से आई एक बच्ची ने उन सभी को भगवान् के दिए उन अनमोल तोहफों का आभाष करा दिया था जिनके तरफ उन्होंने कभी ध्यान ही नहीं दिया था!

सचमुच , गहराई से सोचा जाए तो हमारी ये देखने…सुनने…सोचने…समझने… जैसी शक्तियां किसी आश्चर्य से कम नहीं हैं, ऐसे में ये सोच कर दुखी होने ने कि बजाये कि हमारे पास क्या नहीं है हमें ईश्वर के दिए इन अनमोल तोहफों के लिए शुक्रगुजार होना चाहिए और जीवन की छोटी-छोटी बातों में छिपी खुशियों को मिस नहीं करना चाहिए।
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Life changing Story



एक दार्शनिक अपने एक शिष्य के साथ कहीं से गुजर रहा था। चलते-चलते वे एक खेत के पास पहुंचे। खेत अच्छी जगह स्थित था लेकिन उसकी हालत देखकर लगता था मानो उसका मालिक उस पर जरा भी ध्यान नहीं देता है।
खैर, दोनों को प्यास लगी थी सो वे खेत के बीचो-बीच बने एक टूटे-फूटे घर के सामने पहुंचे और दरवाज़ा खटखटाया।

अन्दर से एक आदमी निकला, उसके साथ उसकी पत्नी और तीन बच्चे भी थे। सभी फटे-पुराने कपड़े पहने हुए थे।

दार्शनिक बोला, “ श्रीमान, क्या हमें पानी मिल सकता है? बड़ी प्यास लगी है!”
“ज़रूर!”, आदमी उन्हें पानी का जग थमाते हुए बोला।

“मैं देख रहा हूँ कि आपका खेत इनता बड़ा है पर इसमें कोई फसल नही बोई गयी है, और ना ही यहाँ फलों के वृक्ष दिखायी दे रहे हैं…तो आखिर आप लोगों का गुजारा कैसे चलता है?”, दार्शनिक ने प्रश्न किया।

“जी, हमारे पास एक भैंस है, वो काफी दूध देती है उसे पास के गाँव में बेच कर कुछ पैसे मिल जाते हैं और बचे हुए दूध का सेवन कर के हमारा गुजारा चल जाता है।”, आदमी ने समझाया।

दार्शनिक और शिष्य आगे बढ़ने को हुए तभी आदमी बोला, “ शाम काफी हो गयी है, आप लोग चाहें तो आज रात यहीं रुक जाएं!”

दोनों रुकने को तैयार हो गए।

आधी रात के करीब जब सभी गहरी नींद में सो रहे थे तभी दार्शनिक ने शिष्य को उठाया और बोला, “चलो हमें अभी यहाँ से चलना है, और चलने से पहले हम उस आदमी की भैंस को चट्टान से गिराकर मार डालेंगे।”

शिष्य को अपने गुरु की बात पर यकीन नहीं हो रहा था पर वो उनकी बात काट भी नहीं सकता था।
दोनों भैंस को मार कर रातों-रात गायब हो गए!

यह घटना शिष्य के जेहन में बैठ गयी और करीब 10 साल बाद जब वो एक सफल उद्यमी बन गया तो उसने सोचा क्यों न अपनी गलती का पश्चाताप करने के लिए एक बार फिर उसी आदमी से मिला जाए और उसकी आर्थिक मदद की जाए।

अपनी चमचमाती कार से वह उस खेत के सामने पहुंचा।
शिष्य को अपनी आँखों पे यकीन नहीं हो रहा था। वह उजाड़ खेत अब फलों के बागीचे में बदल चुका था… टूटे-फूटे घर की जगह एक शानदार बंगला खड़ा था और जहाँ अकेली भैंस बंधी रहती थी वहां अच्छी नस्ल की कई गाएं और भैंस अपना चारा चर रही थीं।

शिष्य ने सोचा कि शायद भैंस के मरने के बाद वो परिवार सब बेच-बाच कर कहीं चला गया होगा और वापस लौटने के लिए वो अपनी कार स्टार्ट करने लगा कि तभी उसे वो दस साल पहले वाला आदमी दिखा।

“ शायद आप मुझे पहचान नहीं पाए, सालों पहले मैं आपसे मिला था।”, शिष्य उस आदमी की तरफ बढ़ते हुए बोला।
“नहीं-नहीं, ऐसा नहीं है, मुझे अच्छी तरह याद है, आप और आपके गुरु यहाँ आये थे…कैसे भूल सकता हूँ उस दिन को; उस दिन ने तो मेरा जीवन ही बदल कर रख दिया। आप लोग तो बिना बताये चले गए पर उसी दिन ना जाने कैसे हमारी भैंस भी चट्टान से गिरकर मर गयी। कुछ दिन तो समझ ही नहीं आया कि क्या करें, पर जीने के लिए कुछ तो करना था, सो लकड़ियाँ काट कर बेचने लगा, उससे कुछ पैसे हुए तो खेत में बोवाई कर दी… सौभाग्य से फसल अच्छी निकल गयी, बेचने पर जो पैसे मिले उससे फलों के बागीचे लगवा दिए और यह काम अच्छा चल पड़ा और इस समय मैं आस-पास के हज़ार गाँव में सबसे बड़ा फल व्यापारी हूँ…सचमुच, ये सब कुछ ना होता अगर उस भैंस की मौत ना हुई होती !

“लेकिन यही काम आप पहले भी कर सकते थे?”, शिष्य ने आश्चर्य से पूछा।
आदमी बोला, “ बिलकुल कर सकता था! पर तब ज़िन्दगी बिना उतनी मेहनत के आराम से चल रही थी, कभी लगा ही नहीं कि मेरे अन्दर इतना कुछ करने की क्षमता है सो कोशिश ही नहीं की पर जब भैंस मर गयी तब हाथ-पाँव मारने पड़े और मुझ जैसा गरीब-बेहाल इंसान भी इस मुकाम तक पहुँच पाया।”
आज शिष्य अपने गुरु के उस निर्देश का असली मतलब समझ चुका था और बिना किसी पश्चाताप के वापस लौट पा रहा था।


Friends, कई बार हम परिस्थितियों के इतने आदि हो जाते हैं कि बस उसी में जीना सीख लेते हैं, फिर चाहे वो परिस्थितियां बुरी ही क्यों न हों!
हम अपनी जॉब से नफरत करते हैं पर फिर भी उसे पकड़े-पकड़े ज़िन्दगी बिता देते हैं, तो कई बार हम बस इसलिए नये business के बारे में नहीं सोचते क्योंकि हमारा मौजूदा बिजनेस दाल-रोटी भर का खर्चा निकाल देता है! पर ऐसा करने में हम कभी भी अपने full potential को realize नहीं कर पाते हैं और बहुत सी ऐसी चीजें करने से चूक जाते हैं जिन्हें करने की हमारे अन्दर क्षमता है और जो हमारी life को कहीं बेहतर बना सकती हैं।

सोचिये, कहीं आपकी ज़िन्दगी में भी तो कोई ऐसी भैंस नहीं जो आपको एक बेहतर ज़िन्दगी जीने से रोक रही है…कहीं ऐसा तो नहीं कि आपको लग रहा है कि आपने उस भैंस को बाँध कर रखा है जबकि असलियत में उस भैंस ने आपको बाँध रखा है! और अगर आपको लगे कि ऐसा है, तो आगे बढिए…हिम्मत करिए, अपनी रस्सी को काटिए; आजाद होइए…
आगे बढ़े पर अपने व्यावसायिक जीवन को सफल बना कर परिवार को उन्नति के पथ पर अग्रसर करे।
********************
अगर जिन्दगी में संघर्ष नहीं है तो वहाँ पर सफलता भी नहीं है।
_______फेडरिक डगलस





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Time for Change



Read carefully !

दोस्तो आज आपको एक जरूरी जानकारी देता हूं जो आपकी लाइफ बदल सकती है, बशर्ते आप बदलना चाहो तो...

95% लोगों की जिंदगी ऐसी चलती है--
 परिवार के सदस्य                   मुखिया
शादी के बाद -- 6 ( खाने वाले )>1( कमाने वाले)
1 साल के बाद-- 7( खाने वाले)>1( कमाने वाले)
2 साल के बाद--8( खाने वाले )>1( कमाने वाले)
10 साल बाद--8 ( खाने वाले )>1( कमाने वाले)
20 साल बाद--8( खाने वाले )>1( कमाने वाले)
25 साल बाद--8( खाने वाले )>2 ( कमाने वाले)
30 साल बाद--8( खाने वाले )>1( कमाने वाले)
(क्योकि पापा नौकरी से  RETIRED )

कभी ऐसा देखा या सुना है--------
शादी के बाद--6( खाने वाले) >1( कमाने वाले)
1साल के बाद--7( खाने वाले )>100(कमाने वाले)
2साल के बाद -8( खाने वाले )>1000(कमाने वाले)
3 साल के बाद--8( खाने वाले )>10000(कमाने वाले)
4 साल के बाद --8(खाने वाले )>100000 ( कमाने वाले)
5 साल के बाद--8( खाने वाले )>1000000 ( कमाने वाले)
6 साल के बाद -8(खानेवाले )>10000000 ( कमाने वाले)
7साल के बाद-8(खाने वाले )>100000000 ( कमाने वाले)

आइये आपको बताते है कि ये कैसे संभव हैं .
आपने सुना ,देखा व समझा होगा -
          TIME = MONEY
एक इंसान पूरी जिंदगी मैं कितना काम करता है आओ जानते हैं-

1 ( एक इंसान) X 10 (रोज कार्य घंटे)X 30 (दिन) X12 ( महीने) X 40 (साल कीजिंदगी)
= 144000 घंटे ,एक इंसान पूरी जिंदगी मे अकेले इससे ज्यादा काम चाहकर भी नहीं सकता |

 इससे फर्क नहीं पडता कि सैलरी कितनी भी  हो ,चाहे वो 10 हजार हो या 50 हजार हो या 2 लाख हो,चाहे वो HCL का या  IBM का Top Level का SOFTWARE ENGG ही क्यो ना हो, अगर वो अकेला JOB कर रहा है; तो वो Hard Work ही कर रहा है;

SCIENCE और Economy का एक Servay कहता है---
 महगाई  रेशियो
 वैज्ञानिक का नाम-- आमृतसेन
   20  वर्ष् का अन्तराल
  1920 ------   1₹  में घर चलता था
  1940 ------   10₹ में घर चलता था
  1960 ------   100₹ में घर चलता था
  1980 ------   1000₹ में घर चलता था
  2000 ------   10000₹ में घर चलता था
  2020 ------   1 लाख ₹ चहिये ही चाहिये
आप सोच सकते है कि जो इंसान सन् 2000 में एक महीने का 10000 ₹  कमाता था तो उसका  घर - परिवार सुखी से रहता था।
इसी तरह सन् 2020 तक जो इंसान महीने का 1 लाख रुपये  नहीं कमायेगा वो जिंदगी जियेगा नहीं बल्कि काटेगा । इसका एक ही उपाय है।

HARD WORK  की सोच को बदलकर 2020 आने से पहले SMART WORK को अपना लेना।

अब देखते हैं कि Smart Work किसे कहते हैं, जो BUSINESSMAN और Networker करते हैं।

पूरी दुनिया में सबके पास बराबर 24 घंटे है , आइये जानते है कि नौकरी  वाले और बिजनेसमैन/ नेटवर्कर अपने काम करने वाले 10 घंटे कैसे इस्तेमाल करते है -

नौकरी वाला-
10+10+10+10+10+10 =60 घंटे हफ्ताX4= 240 घंटे
240घंटेX6 =1440 घंटे 6 महीने अकेले काम करने पर,

बिजनेसमैन/ नेटवर्कर-
10X10X10X10X10...................
10X(6बार) हर महीने सिर्फ 10 लोगों की टीम बनाने पर
1X10=10
10X10=100
100X10= 1000
1000X10=10000
10000X10=100000
100000X10=1000000
10 लाख घंटे 6 महीने तक टीम के साथ काम करने पर,

और अगर टीम मैं सिर्फ और सिर्फ 1000 ही लोग हो तो
1000 ( लोग) X 10 (घंटे) X 15 ( दिन)= 150000 घंटे

यनि कि जो काम एक पढा लिखा इंसान पूरी जिंदगी मैं कर पाता है
वही काम एक कम पढा लिखा या अनपढ भी, और पढे लिखे  इंसान भी सिर्फ और सिर्फ  1000 लोगों की टीम बनाकर 15 दिन में कर लेता हैं तो पूरी जिंदगी का पैसा 15 दिन मै भी कमाया जा सकता है।

सिर्फ इसी ताकत की वजह से बहुत सारे कम पढे लिखे लोग भी कम समय में करोडपती बन जाते हैं,और बहुत सारे नौकरी की मानसिकता वाले 95% बहुत समझदार और पढे लिखे लोग इस बात को पचा नहीं पाते और जो यकीन नहीं करते,और वहीं के वहीं रह जाते हैं ,और जो यकीन कर लेते हैं वो SUCCESS  हो जाते हैं और करोडपती बन जाते हैं। और इससे कोई फर्क नहीं पडता कि  वे अनपढ है, या कम पढे लिखे है, या PHD Holder हैं,

DEGREE सिर्फ नौकरी करके जिंदगी काटने के लिये चाहिये , पैसै कमाने के लिये नहीं,और सबसे जरूरी बात पैसे कमाने से पढाई का दूर दूर तक कोई भी लेना देना नहीं है ,यही वजह है कि इस दुनिया मे सबसे अमीर लोग अनपढ या कम पढे लिखे ही हैं जिनकी हजारों कंपनियों में से किसी एक कंपनी में Higher Educated लोग नौकरी मांगने जाते हैं।

और ये जो 5% लोग जो सक्सेसफुल बिजनेसमैन और  नैटवर्कर होते हैं, ये दोनों टाइम मल्टीप्लाई करते हैं ,दोनों मै बस फर्क इतना है कि  ट्रेडिशनल बिजनेसमैन यही काम फुल टाइम देकर कई सौ करोड रूपये लगाकर सबको सैलरी देकर एक बडी कंपनी खडी करके अपना ASSETS खडा करते हैं तब मोटी कमाई करते हैं.और यही काम एक नेटवर्कर बिना पैसा लगाए अपना ASSETS खडा करके सेम कमाई करता है। इसलिये कुछ बेवकूफ लोग 3 से 5 साल मैं अपना दिमाग ना चलाकर करोडपती बन जाते हैं। और कुछ समझदार लोग अपना दिमाग चलाकर पूरी जिंदगी एक नौकरी मै बिताने के बाद भी अपनी समझदारी नहीं छोडते।
इसलिये आप सबसे निवेदन है कि अपनी समझदारी को एक साइड मै रखकर थोडा समय निकालकर इसके बारे में जरूर सोचे।
********************
कोई तब तक आपकी सवारी नहीं कर सकता जब तक आपकी पीठ झुकी ना हो।
_______मार्टिन लूथर किंग , जूनियर





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